World Bhojpuri News: दुनिया के इन देशों में बोली जाती है भोजपुरी, जानिए भाषा का वैश्विक इतिहास और पहचान
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026 | विशेष रिपोर्ट
भोजपुरी केवल भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश तक सीमित भाषा नहीं है, बल्कि इसकी पहचान दुनिया के कई देशों में फैली हुई है। प्रवासी भारतीयों के साथ भोजपुरी भाषा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों तक पहुंची। आज भी इन देशों में भोजपुरी से जुड़ी परंपराएं, लोकगीत, धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय मूल के समुदायों की पहचान का हिस्सा हैं।
भोजपुरी भाषा का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ा है। उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में भारत से बड़ी संख्या में लोग गिरमिटिया मजदूरों के रूप में विभिन्न देशों में गए। उनके साथ उनकी भाषाएं, लोकगीत, रीति-रिवाज और पारिवारिक परंपराएं भी पहुंचीं। इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया ने भोजपुरी को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
किन देशों में बोली जाती है भोजपुरी?
1. भारत: भोजपुरी भाषा का प्रमुख केंद्र
भारत में भोजपुरी मुख्य रूप से पश्चिमी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है। बिहार के भोजपुर, बक्सर, छपरा, सिवान और गोपालगंज जैसे इलाकों के साथ उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, बलिया और वाराणसी क्षेत्र में भी भोजपुरी का व्यापक उपयोग होता है।
भोजपुरी लोकगीत, बिरहा, कजरी, सोहर, छठ गीत, लोकनाट्य और भोजपुरी सिनेमा इस भाषा को लोकप्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. मॉरीशस: भारतीय विरासत में भोजपुरी का विशेष स्थान
हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस में भोजपुरी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। भारतीय मूल के लोगों के साथ यह भाषा यहां पहुंची और पीढ़ियों तक पारिवारिक तथा सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा बनी रही।
मॉरीशस में भोजपुरी गीत, लोकसंगीत, रेडियो कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भाषा की परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। यहां भोजपुरी की स्थानीय शैली भी विकसित हुई है, जिसमें समय के साथ अन्य भाषाओं का प्रभाव दिखाई देता है।
3. फिजी: फिजियन हिंदी और भोजपुरी विरासत
प्रशांत महासागर में स्थित फिजी में भारतीय मूल के समुदायों की भाषा और संस्कृति पर भोजपुरी तथा अवधी सहित उत्तर भारतीय भाषाओं का गहरा प्रभाव है।
यहां प्रचलित फिजियन हिंदी को केवल मानक भोजपुरी नहीं कहा जा सकता। यह कई उत्तर भारतीय भाषाई रूपों के मेल से विकसित हुई एक विशिष्ट भाषा है। इसके बावजूद भोजपुरी लोकगीतों, पारिवारिक शब्दावली और सांस्कृतिक परंपराओं की विरासत आज भी महत्वपूर्ण है।
4. सूरीनाम: सरनामी हिंदुस्तानी में भोजपुरी का प्रभाव
दक्षिण अमेरिका के देश सूरीनाम में भारतीय मूल के लोगों की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। यहां सरनामी हिंदुस्तानी नामक भाषा प्रचलित है, जिसकी जड़ें भोजपुरी, अवधी और अन्य उत्तर भारतीय भाषाई रूपों में हैं।
सरनामी हिंदुस्तानी को भोजपुरी का बिल्कुल समान रूप मानना सही नहीं होगा। यह प्रवासी समुदायों के बीच विकसित एक अलग भाषाई पहचान है, जो भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक प्रभाव को दर्शाती है।
5. गुयाना: भोजपुरी और भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं
दक्षिण अमेरिका के गुयाना में भारतीय मूल के समुदायों ने भोजपुरी सहित उत्तर भारतीय भाषाओं की कई परंपराओं को आगे बढ़ाया। लोकगीतों, धार्मिक कार्यक्रमों और पारिवारिक संस्कारों में इस विरासत के प्रभाव देखे जा सकते हैं।
हालांकि, आधुनिक गुयाना में अंग्रेजी प्रमुख आधिकारिक भाषा है और भोजपुरी का प्रयोग व्यापक दैनिक भाषा के रूप में पहले की तुलना में सीमित है। इसलिए यहां भोजपुरी की उपस्थिति को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में समझना अधिक उचित है।
6. त्रिनिदाद और टोबैगो: भोजपुरी लोकगीतों की विरासत
कैरेबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों की सांस्कृतिक परंपराओं में भोजपुरी का ऐतिहासिक योगदान रहा है। यहां भारतीय प्रवासियों के साथ आए लोकगीतों, धार्मिक गीतों और पारंपरिक संगीत ने स्थानीय संस्कृति को प्रभावित किया।
चटनी संगीत जैसी शैलियों में भारतीय और कैरेबियाई संगीत परंपराओं का मेल दिखाई देता है। हालांकि, भोजपुरी आज यहां अधिकांश लोगों की मुख्य दैनिक भाषा नहीं है।

अन्य देशों में भी भोजपुरी की सांस्कृतिक पहुंच
नेपाल के तराई क्षेत्र में भोजपुरी व्यापक रूप से बोली जाती है। इसके अतिरिक्त अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और अन्य देशों में बसे भोजपुरी भाषी प्रवासी समुदाय भी त्योहारों, सांस्कृतिक संस्थाओं, संगीत और डिजिटल माध्यमों से भाषा को आगे बढ़ा रहे हैं।
यहां एक अंतर समझना जरूरी है: किसी देश में भोजपुरी भाषी प्रवासियों का मौजूद होना और वहां भोजपुरी का व्यापक स्थानीय भाषा के रूप में इस्तेमाल होना, दोनों अलग बातें हैं।

भोजपुरी भाषा का भविष्य क्या है?
इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन समाचार वेबसाइटों, यूट्यूब, भोजपुरी संगीत और फिल्मों ने इस भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के अवसर बढ़ाए हैं। विदेशों में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोग भी ऑनलाइन माध्यमों के जरिए अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रह सकते हैं।
भोजपुरी की वैश्विक पहचान को मजबूत करने के लिए बच्चों को भाषा सिखाना, लोकगीतों का दस्तावेजीकरण करना, साहित्य प्रकाशित करना और प्रवासी समुदायों के सांस्कृतिक इतिहास को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
भोजपुरी भारत की क्षेत्रीय भाषा होने के साथ-साथ एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत भी है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों में इसकी ऐतिहासिक छाप आज भी दिखाई देती है। अलग-अलग देशों में भोजपुरी और उससे जुड़ी भाषाओं के रूप बदल गए हैं, लेकिन भाषा की सांस्कृतिक विरासत लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।




