नई दिल्ली | 28 सितंबर 2026: 28 सितंबर भारत के इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन महान गायिका और भारत रत्न लता मंगेशकर की जयंती के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के रूप में भी याद किया जाता है।
एक ओर लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज से भारतीय संगीत को विश्वभर में पहचान दिलाई, वहीं भगत सिंह ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अपने संघर्ष, विचारों और बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ था। भारतीय संगीत जगत में उनका योगदान कई दशकों तक रहा। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।
लता मंगेशकर ने हिंदी के अलावा कई भारतीय भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए और उनकी आवाज भारतीय सिनेमा के संगीत की एक महत्वपूर्ण पहचान बनी। भारत सरकार के अभिलेखों के अनुसार उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले।
6 फरवरी 2022 को उनके निधन के बाद देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। उनकी जयंती पर आज भी उनके गीतों और संगीत विरासत को याद किया जाता है।
शहीद भगत सिंह की जयंती
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा गांव, तत्कालीन लायलपुर जिले में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के फैसलाबाद क्षेत्र में है। भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव डिजिटल अभिलेख में भी उनके जन्म की तारीख 28 सितंबर 1907 दर्ज है।
भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारी व्यक्तित्वों में शामिल रहे। उनके विचार, लेखन और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष ने युवाओं सहित अनेक लोगों को प्रभावित किया। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई।
उनकी जयंती पर देशभर में उनके साहस, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को स्मरण किया जाता है। भारत सरकार के एक आधिकारिक संदेश में भी भगत सिंह के बलिदान और स्वतंत्रता के उद्देश्य के प्रति उनके समर्पण को याद किया गया है।

28 सितंबर का विशेष संदेश
28 सितंबर हमें भारतीय समाज और इतिहास के दो अलग-अलग क्षेत्रों की महान विरासतों को याद करने का अवसर देता है। लता मंगेशकर ने संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया, जबकि भगत सिंह का जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
दोनों की स्मृति आज भी अलग-अलग रूपों में लोगों के बीच जीवित है—एक की आवाज गीतों के माध्यम से और दूसरे के विचार एवं संघर्ष इतिहास के पन्नों के माध्यम से।
भारत सुपरफास्ट की ओर से स्वर कोकिला लता मंगेशकर और शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।




