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काठमांडू/तिब्बत, 28 अगस्त 2026: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद आई बाढ़ ने गांवों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में 579 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में कम से कम 5 लोगों की मौत बताई गई है। नेपाल में करीब 1,924 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि तिब्बत में 558 लोग अभी भी लापता हैं। आंकड़े लगातार बदल रहे हैं क्योंकि दुर्गम इलाकों में राहत और खोज अभियान जारी है।
ग्लेशियर टूटने के बाद मची तबाही
अधिकारियों और वैज्ञानिकों के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर टूटकर नदी में गिरने से हुई। इसके बाद भारी मात्रा में पानी, मलबा और चट्टानें तेजी से नीचे की ओर आईं और नदी घाटियों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
बाढ़ का सबसे गंभीर असर नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में देखा गया। कई बस्तियां मलबे में दब गईं और महत्वपूर्ण सड़क एवं पुल संपर्क टूट गया।
बचाव अभियान में हजारों जवान तैनात
नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में जुटे हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल में 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि करीब 14,829 सुरक्षा कर्मियों को राहत अभियान में लगाया गया है।
नई बाढ़ का भी खतरा
बाढ़ के बाद पहाड़ी क्षेत्र में मलबे के कारण एक अस्थायी झील/जलाशय बनने से नई चिंता पैदा हुई थी। इसके कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। हालांकि बाद में स्थिति को अपेक्षाकृत नियंत्रित बताया गया और राहत अभियान दोबारा शुरू किया गया।
नेपाल के अधिकारी अब भी ऊपरी इलाकों में बनी झीलों और जल अवरोधों पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि इनके टूटने की स्थिति में अचानक दोबारा बाढ़ आ सकती है।
90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों के अनुसार, इस आपदा से 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत है। स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों सहित कई बुनियादी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
भारत के लोगों पर भी असर
नेपाल-तिब्बत क्षेत्र लोकप्रिय तीर्थ और पर्यटन मार्ग है। इस कारण प्रभावित और लापता लोगों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्टों में भारतीय नागरिकों के भी बड़ी संख्या में लापता होने की जानकारी सामने आई है।
भारत की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी बाढ़ के असर को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। नेपाल में बाढ़ के कारण सीमा व्यापार और परिवहन पर भी असर पड़ा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में तेजी से हो रहे बदलाव से ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ रहा है। ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
नेपाल-तिब्बत फ्लैश फ्लड: मुख्य बातें
नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही।
नेपाल में 579 और तिब्बत में 5 मौतों की पुष्टि वाली ताजा रिपोर्ट सामने आई है।
करीब 2,500 लोगों के दोनों क्षेत्रों में लापता होने की रिपोर्ट है।
हजारों लोगों को बचाया जा चुका है।
कई सड़कें, पुल, घर और बिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।
प्रभावित क्षेत्र में दोबारा बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
नोट: मौत और लापता लोगों के आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान के साथ बदल सकते हैं। अलग-अलग सरकारी और समाचार स्रोतों में आंकड़ों में अंतर भी देखा जा रहा है।